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नेताओं को कांग्रेस का कर्ज चुकाने का समय नहीं है, बल्कि समय है, कांग्रेस को कार्यकर्ताओं का कर्ज चुकाने का ?

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नेताओं को कांग्रेस का कर्ज चुकाने का समय नहीं है, बल्कि समय है, कांग्रेस को कार्यकर्ताओं का कर्ज चुकाने का ?

कांग्रेस के तीन दिवसीय नव संकल्प चिंतन शिविर के उद्घाटन सत्र में कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमती सोनिया गांधी ने एक बार फिर से कांग्रेस के नेताओं को कहा कि अब कांग्रेस का कर्ज चुकाने का समय आ गया है !
श्रीमती सोनिया गांधी की चिंता वाजिब है क्योंकि कांग्रेस के भीतर ऐसे अनेक नेता मौजूद हैं जो पीढ़ी दर पीढ़ी सत्ता और संगठन की लगातार मलाई खा रहे हैं ! लेकिन जिनकी वजह से यह नेता मलाई खा रहे हैं वह कार्यकर्ता पीढ़ी दर पीढ़ी आज भी वैसा ही है जैसा पहले था !
इन नेताओं पर कांग्रेस का कर्ज तो हे ही लेकिन यह नेता सबसे बड़े कर्जदार तो कांग्रेस के आम कार्यकर्ताओं के हैं, जिनकी ईमानदारी कांग्रेस के प्रति वफादारी और संघर्ष के कारण कांग्रेस सत्ता में आती है और सत्ता में आने के बाद यही चुनिंदा नेता सत्ता की मलाई खाते हैं आम कार्यकर्ता वहीं पर खड़ा रहता है जहां से उसने कॉन्ग्रेस झंडा उठाया था !
जिन नेताओं से श्रीमती सोनिया गांधी कांग्रेस का कर्ज चुकाने का आह्वान कर रही है यह नेता सत्ता में आने के बाद फिर से कांग्रेस के कर्जदार हो जाएंगे क्योंकि यही नेता चुनाव लड़ेंगे या फिर इनके परिवार के सदस्यों को यह नेता चुनाव लड़ वायगे और सत्ता में आने के बाद पूरे 5 साल तक सत्ता का आनंद उठाएंगे ? स्लोगन यह होना चाहिए कि अब कार्यकर्ताओं का कर्ज चुकाने का समय आ गया है ? कांग्रेस के भीतर नेता कार्यकर्ताओं को मजबूत करने और उन्हें सक्षम बनाने की बात तो करते हैं मगर जब समय आता है तब कार्यकर्ता मायूस और कुंठित होकर अपने घरों में जाकर बैठ जाता है !
कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व में कभी यह सुना है कि किसी पद को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच में कोई विवाद चल रहा है ?
पद को लेकर विवाद की खबर अक्सर नेताओं के बीच से ही आती है ? और पार्टी छोड़कर भी नेता ही भागते हैं कार्यकर्ता नहीं कार्यकर्ता हमेशा अपने मुकाम पर कायम रहता है ? कांग्रेस को चिंतन और मंथन करने की जरूरत यही है कि वह अपने आप को कार्यकर्ताओं का कर्जदार समझे और कार्यकर्ताओं का कर्ज चुकाने का प्रयास करे ?
तीन दिवसीय चिंतन शिविर में एक सेशन कार्यकर्ताओं से संवाद का भी होना चाहिए था, जो शायद नहीं है ? क्योंकि कांग्रेस कमजोर क्यों हो रही है, यह मजबूत कैसे होगी यह नेताओं से ज्यादा ठीक से कार्यकर्ता ही बताता ? वह नेता चिंतन कर रहे जिन नेताओं के कारण कांग्रेस चिंता में डूबी है ? पूरे 8 साल तक अकेले कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी केंद्र की भाजपा सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के खिलाफ संघर्ष करते हुए अकेले दिखाई दिए, कांग्रेस के किसी भी राज्य और केंद्र के नेताओं ने राहुल गांधी का साथ नहीं दिया बल्कि कई नेता तो नेतृत्व पर सवाल भी उठाते हुए देखे गए ? यदि यह नेता राहुल गांधी के साथ मजबूती से खड़े रहते तो शायद श्रीमती सोनिया गांधी को अपनी दूसरी राजनीतिक पारी खेलने के लिए मैदान में नहीं उतरना पड़ता क्योंकि राहुल गांधी ही कांग्रेस को 2019 में सत्ता में वापसी करा देते, लेकिन कांग्रेस को सत्ता में वापसी कराना तो दूर की बात रही राहुल गांधी ने कुंठित होकर कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया ?
अब वही नेता राहुल गांधी को उन्हें कांग्रेस का राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाने के लिए आह्वान कर रहे हैं, क्या जो नेता राहुल गांधी को अध्यक्ष बनाने की मांग कर रहे हैं क्या वह पूरी निष्ठा और ईमानदारी दिखा रहे हैं यदि ऐसा है तो फिर राहुल गांधी ने समय से पहले अध्यक्ष पद क्यों छोड़ा था !
गांधी परिवार कांग्रेस को मजबूत करने के लिए, संसद से लेकर सड़कों पर नजर आया मगर नदारद दिखे वह नेता जो कांग्रेस का कर्जा लेकर बैठे हुए हैं और इंतजार कर रहे हैं कि गांधी परिवार उन्हें फिर से सत्ता तक पहुंचाएं ! उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव को शायद ही कांग्रेस के नेता राजनीतिक विश्लेषक और राजनीतिक पंडित भूले होंगे की उस चुनाव में कांग्रेस की राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमती प्रियंका गांधी ने कितनी जबरदस्त मेहनत की थी लेकिन उत्तर प्रदेश चुनाव में श्रीमती प्रियंका गांधी के साथ कोई भी बड़ा नेता नजर नहीं आया ?
अंत में बात वही है समय कार्यकर्ताओं का कर्ज चुकाने का है, नेता तो कर्ज चुका भी देंगे तो भी बाद में वह फिर से कर्जदार हो जाएंगे ? दिल्ली से उदयपुर के लिए निकले राहुल गांधी ने कार्यकर्ताओं का जोश देख ही लिया है की कार्यकर्ता गांधी परिवार के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए तैयार है?
कांग्रेस को जरूरत है कार्यकर्ताओं का कर्ज चुकाने की ?