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68 वां वन्य जीव संरक्षण सप्ताह का हुआ शुभारंभ
वन्य जीवों के प्रति करें नई पीढ़ी को जागरूक- श्री देवनानी
जानवरों में है अनुशासन की भावना – श्री मेहरा
अजमेर, 02 अक्टूबर। 68 वें वन्य जीव संरक्षण सप्ताह के शुभारंभ के अवसर पर विधायक श्री वासुदेव देवनानी ने वन्य जीवों के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक करने की बात कही। संभागीय आयुक्त श्री मेहरा ने वन्य जीवों में अनुशासन की भावना होने के बारे में अपने विचार व्यक्त किए।
68 वें वन्य जीव संरक्षण सप्ताह का शुभारंभ रविवार को जवाहर रंगंज में किया गया। इसमें विधायक श्री वासुदेव देवनानी ने कहा कि वज्य जीवों के प्रति नई पीढ़ी को जागरूक किया जाना चाहिए। इस प्रकार के आयोजनों से यह कार्य आसानी से हो पाता है। वन्य जीव वनों की रौनक है। इनसे वनों में जीवन का एहसास होता है। इसी कारण प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने भारत में विलुप्त हो चुकी चीता प्रजाति को नामीबिया से मंगवाकर जंगलों में छोड़ा। वन बचेंगे तो ही वन्य जीव बचेंगे। इसलिए वनों को बढ़ाने पर ध्यान दिया जाना चाहिए। पृथ्वी के पर्यावरण को संतुलित रखने में वनों का महत्व सर्वविदित है। उन्होंने वन्य जीव संरक्षण में भागीदारी निभाने का आह्वान किया।
श्री देवनानी ने विधानसभा क्षेत्र के विकास कार्यों के बारे में भी वन वन विभाग के अधिकारियों के साथ चर्चा की। ईदगाह तथा लोहगल में पानी की टंकी तथा शास्त्री नगर जनाना चिकित्सालय रोड़ के चौड़ाईकरण के कार्य के लिए आवश्यक एनओसी जारी कराने के लिए कहा। इसके अभाव में विकास कार्य प्रभावित होने से भी अवगत कराया। जनहित के कार्यों को प्राथमिकता से करने के बारे में भी विचार विमर्श किया।
संभागीय आयुक्त श्री बी.एल. मेहरा ने कहा कि वन के पशु अधिक अनुशासित होते हैं। वे प्रकृति द्वारा बनाए गए नियमों तथा अनुशासन में रहकर जीवन यापन करते हैं। वर्तमान में मानव ने प्रकृति के अनुशासन को तोडा है। इसलिए इस प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। हमारी संस्कृति सर्वे भवन्तु सुचिनः की अवधारणा पर कार्य करती है। यह किसी प्राणी को कष्ट नहीं देने की बात कहती हैं। जीवों को स्वाभाविक जीवन जीने की प्रेरणा देती है। वर्तमान में आर्थिक क्रियाकल्पा बढ़ने से जीवों के आवास तथा सुप्ता पर खतरा मण्डराने लगा है। इससे उनका जीवन में व्यवधान होेने लगा। वन्य जीव हमें शिक्षा प्रदान करते हैं।
उन्होंने कहा कि वन्य जीवों को सामान्य एवं स्वाभाविक जीवन जीने के लिए जन जागरूकता पैदा करने की आवश्यकता है। सरकार द्वारा बनाए गए कानूनों की पालना सभी को करनी चाहिए। शिकार जैसी दुष्प्रवृत्ति को रोकने में कानून के साथ-साथ लोकमत की भी भूमिका है। लोकमत निर्माण में इस प्रकार के कार्यक्रम योगदान प्रदान करते हैं। इन्हें ब्लॉक स्तर पर भी करना चाहिए। इसमें जनप्रतिनिधियों के साथ वनों से सम्बन्धित परिवारों को जोड़ा जाएं।
जिला कलक्टर श्री अंशदीप ने कहा कि नई पीढ़ी को वन्य जीव संरक्षण से जोड़ना चाहिए। इससे उनमें जंगल तथा जीवन से प्रेम विकसित होगा। मानव ने अपने स्वार्थ के लिए वन्य जीवों के क्षेत्रों पर अतिक्रमण कर लिया है। इस कारण उन्होंने अपनी जीजीविषा के लिए मानव बस्तियों का रूख किया है। यह होना स्वभाविक है। इसी प्रकार पर्यावरण संतुलन के लिए वेटलेण्ड भी विकसित किए जाने चाहिए।
पुलिस अधीक्षक श्री चूनाराम जाट ने कहा कि बच्चों को वन भ्रमण करवाकर प्रकृति से जोड़ना चाहिए। इससे बच्चों में सहिष्णुता का विकास होता है। शुभारंभ समारोह में डॉ. विवेक शर्मा ने पक्षियों की बाह्य संरचना के बारे में जानकारी प्रदान की। मुख्य संरक्षक श्री विजय एन. ने नर्सरी तकनीक पर अपने विचार व्यक्त किए। आगामी मानूसन के दौरान वितरण योग्य पौधों की तैयारी अभी से करनी चाहिए। कार्यक्रम में राष्ट्रीय सैनिक विद्यालय, मयूर स्कूल, केन्द्रीय विद्यालय, सावित्री कॉलेज, डीएवी एवं भगवंत विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों ने भाग लिया।
उप वन संरक्षक श्री सुनील चिद्री ने कहा कि महात्मा गांधी स्मृति वन उद्यान, डियर पार्क, हर्बल पार्क, नाग पहाड एवं पंचकुण्ड नर्सरी का भ्रमण सोमवार 3 अक्टूबर को प्रातः 6.30 बजे से कराया जाएगा। आनासागर चौपाटी पर साईकल रैली का आयोजन प्रातः 6.30 बजे 4 अक्टूबर को होगा। रैंज परिसर में वन्यजीव एवं पौधारोपण की जानकारी घूघरा नर्सरी में 5 अक्टूबर को दी जाएगी। चौपाटी से इंजिनियरिंग कॉलेज तक मैराथन दौड़ का आयोजन 6 अक्टूबर को होगा। वाद विवाद एवं क्वीज प्रतियोगिता का आयोजन राष्ट्रीय मिलीट्री स्कूल में 7 अक्टूबर को किया जाएगा। इसी प्रकार वन्यजीव सप्ताह का समापन कार्यक्रम महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय में 8 अक्टूबर को प्रातः 9 बजे होगा।
इस अवसर पर पक्षी विशेषज्ञ श्री आबिद अली, एनीमल वेलफेयर सोसायटी के श्री अमर सिंह, श्री सुधीर माथुर एवं मुन्नी देवी सहित भीलवाडा के सहायक वन संरक्षक, समस्त क्षेत्रीय वन अधिकारी एवं संभाग के नर्सरी प्रभारी उपस्थित रहे।

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