KAL KA SAMRAT NEWS INDIA

हर नजरिए की खबर, हर खबर पर नजर

Home » जर्रा जर्रा, टूट टूट कर बिखरता अखिल भारतीय कोली समाज संस्था रजिस्टर्ड नई दिल्ली??
Spread the love

जर्रा जर्रा, टूट टूट कर बिखरता अखिल भारतीय कोली समाज संस्था रजिस्टर्ड नई दिल्ली??

दिल्ली,30 नवम्बर, (विशेष आलेख) अखिल भारतीय कोली समाज संगठन नई दिल्ली रजिस्टर्ड देश में एक जाना पहचाना नाम किसी जमाने में देश के करोड़ों कोली समाज के लोगों के लिए हुआ करता था और यह उनके लिए गर्व की बात भी थी लेकिन वर्तमान हालातों में अखिल भारतीय कोली समाज संस्था नई दिल्ली टूट टूट कर बिखर रहा है और उसे बचाने वाला संभालने वाला कोई नहीं है।


इस महान राष्ट्रीय संगठन की बदहाली पर आंसू बहाने वाले तो करोड़ों हैं

मगर इसके हालात सुधारने का माद्दा रखने वाला हिम्मतवाला कोई योद्धा नहीं है, लगभग 36 महीनों के कार्यकाल में से डेढ़ साल का कार्यकाल महज जुगाली करते हुए ही निकल रहा है और अभी तक नियुक्तियां ही जारी हो रही है, वहीं दूसरी ओर कुंवर जी भाई बावलिया के गुट ने विद्रोह का जो झंडा बुलंद किया था आज भी वह बदस्तूर कायम है, और कुंवर भाई बावलिया गुटके द्वारा एक नया ही संगठन चलाया जा रहा है, तो ऐसे में कुछ और अति महत्वकांक्षी लोगों के द्वारा भी मैदान में कूद पड़ना कोई आश्चर्य की बात नहीं जैसे मध्यप्रदेश के डॉक्टर मोहन लाल माहोर उन्होंने भी अखिल भारतीय कोली समाज संस्था रजिस्टर्ड नई दिल्ली के नाम से ही एक संगठन और ठोक डाला या यूं कहें कि इस संगठन पर अपना दावा प्रस्तुत कर दिया अब ऐसे में तथाकथित रूप से चीख चीख कर दहाड़े मार-मार कर 18 करोड़ 20 करोड़ की आबादी बताने वाले कोली समाज के लोग और उनके नेता किस कोने में दुबके हुए हैं किसी को पता नहीं है, गौरतलब है कि अखिल भारतीय कोली समाज संस्था रजिस्टर नई दिल्ली में इस देश को और अनेक राज्यों को राजनीतिक रूप से सबल और सक्षम बनाने में बहुत मदद की है यहां तक कि राष्ट्रपति भी इस संस्था के अध्यक्ष रह चुके लोग बन चुके हैं और प्रदेशों में एमएलए एमपी मंत्री विधायक सैकड़ों की तादाद में है लेकिन आज यह संगठन अपनी बदहाली पर जार जार आंसू बहा रहा है और इसके आंसू पोछने वाला कोई नहीं है।

गत वर्ष निर्वाचित हुए अखिल भारतीय कोली समाज संगठन नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष अजीत भाई पटेल के खिलाफ

कुवरजीभाई ने उसी समय बगावत का बिगुल बजा दिया था और उन्हें राष्ट्रीय अध्यक्ष मानने से इंकार कर दिया था जिसकी वजह से पूरे देश में इस संगठन की शाश्वत थापर सवाल खड़े हो गए थे और उसका समाधान भी अभी नहीं हुआ है नई दिल्ली के संस्था पंजीकरण रजिस्ट्रार ऑफिस में अभी भी मुकदमा चल रहा है जिसका फैसला होना बाकी है ऐसे में मध्यप्रदेश में मोहनलाल माहौर द्वारा एक और नया शगुफा छोड़कर अजीत भाई पटेल की अध्यक्षता को नकारा जा रहा है।
पूरे देश में यह बताया जाता है कि 18 से 20 करोड़ के लगभग कोली समाज के लोगों की विभिन्न वर्गो एवं समूहों में उपस्थिति है भारत के लगभग प्रत्येक राज्य में कोली समाज की कहीं कम तो कहीं बहुत ज्यादा आबादी मौजूद है जम्मू कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक और गुजरात से लेकर आसाम तक लगभग हर एक राज्य में कोली समाज बहुतायत में पाया जाता है लेकिन अखिल भारतीय कोली समाज संस्था संगठन नई दिल्ली ने जो 45, 50 वर्षों में लोगों में विश्वास कायम किया था और जो प्रसिद्धि हासिल की थी वह अब लगभग शून्यता की ओर तीव्र गति से अग्रसर है पूरे देश के कोली समाज में यह विचार बलवान होता जा रहा है कि अखिल भारतीय कोली समाज संस्था नई दिल्ली अब टुकड़े टुकड़े हो चुकी है और इसे संभालने वाला कोई नहीं है इसलिए हर एक राज्य में कुछ अति उत्साही और महत्वकांक्षी लोगों के द्वारा नए-नए संगठन खड़े किए जा रहे हैं जो कि एक राष्ट्रीय स्तर के संगठन के लिए गहरे आघात के समान है, यहीं नहीं अजीत भाई पटेल की निष्क्रियता ने भी अनेक प्रदेशों में लोगों को दूसरे संगठनों की ओर मोहित होने पर विवश किया लगभग संगठन को मूर्त रूप लिए हुए 18 से 20 माह का वक्त निकल चुका है लेकिन अखिल भारतीय कोली समाज संस्था रजिस्टर्ड नई दिल्ली के वैधानिक रूप से निर्वाचित राष्ट्रीय अध्यक्ष ने अभी तक अपने कार्यकाल में केवल गोल्डन जुबली मनाने का कार्य कर पाए हैं राज्यों में संगठन के हालात बद से बदतर हो चुके हैं और दूसरे संगठनों के मैदान में आने से कोली समाज के अधिकांश प्रबुद्ध एवं बुद्धिजीवी वर्ग में अनेक प्रकार की आशंकाओं का माहौल बना हुआ है जिस कारण से संस्था एवं संगठन के कार्य सुचारू रूप से नहीं हो पा रहे हैं और लोगों का मोह एवं रुचि इन संगठनों के प्रति खत्म हो चुकी है।

असहाय सा महसूस कर रहा है देश का कोली समाज,,,

गौरतलब है कि भारत में ही नहीं दक्षिण एशिया के अनेक राज्यों देशों जैसे पाकिस्तान अफगानिस्तान नेपाल भूटान बांग्लादेश वर्मा श्रीलंका मलेशिया इंडोनेशिया आदि देशों में भी कोली समाज की आबादी बहुतायत में है लेकिन केवल भारत में ही 18 से 20 करोड़ कोली समाज के लोग मौजूद हैं जिनका की एकमेव प्रतिनिधित्व करने वाला संगठन अखिल भारतीय कोली समाज संस्था रजिस्टर्ड नई दिल्ली कहा जाता था लेकिन आज वह संगठन की हालत बद से बदतर हो चुकी है और हर दूसरे या तीसरे दिन अभी तक केवल नियुक्तियां त्यागपत्र और स्पष्टीकरण ओं का दौर ही चल रहा है देश का कोली समाज समझ ही नहीं पा रहा है कि आखिर हो क्या रहा है और वह स्वयं को असहाय सा महसूस कर रहा है अब कोली समाज संगठन की राष्ट्रीय स्तर पर आवाज बुलंद करने वाला कोई भी संगठन मौजूद नहीं है।
अब वक्त आ गया है कि अखिल भारतीय कोली समाज संगठन को एक बार पुणे स्वतंत्र रूप से जीवित किया जाए और इसकी कमान कुछ बेहतरीन समझदार और सुलझे हुए लोगों के सुपुर्द की जाए अजीत भाई पटेल की अध्यक्षता बदस्तूर जारी रहे लेकिन राष्ट्रीय कार्यक्रमों का संचालन भी उचित प्रकार से हो सके।

You may have missed