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बीते वित्त वर्ष में भाजपा को वेदांता का चंदा चार गुना बढ़कर 97 करोड़ रुपये हुआ, कांग्रेस का घटा

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बीते वित्त वर्ष में भाजपा को वेदांता का चंदा चार गुना बढ़कर 97 करोड़ रुपये हुआ, कांग्रेस का घटा
नई दिल्ली : उद्योगपति अनिल अग्रवाल की खनन कंपनी वेदांता लिमिटेड के द्वारा सत्ताधारी बीजेपी को दी जाने वाली चंदा राशि 2024-25 में चार गुना होकर 97 करोड़ रुपये रही. यह जानकारी कंपनी की ताजा वार्षिक रिपोर्ट में दी गई है.
कंपनी ने रिपोर्ट के मुताबिक ‘विविध मद’ के अंतर्गत, राजनीतिक पार्टियों को चंदे के साथ-साथ अपनी मूल कंपनी लंदन में सूचीबद्ध वेदांता रिसोर्सेज पीएलसी को किए गए प्रबंधन और ब्रांड शुल्क व्यय का विवरण दिया है. इसके अनुसार कंपनी ने पिछले वित्त वर्ष (2024-25) में कुल 157 करोड़ रुपये का पालिटिकल चंदा दिया.इतना ही नहीं रिपोर्ट के अनुसार, एक तरह जहां भाजपा को दिया गया चंदा चार गुना हो गया, वहीं दूसरी तरफ मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस को दिया जाने वाला चंदा घटकर महज 10 करोड़ रुपये रह गया.
इसी क्रम में बीते फाइनेंस ईयर में कंपनी ने बीजेपी को 97 करोड़ रुपये का चंदा दिया. यह राशि 31 मार्च, 2024 को खत्म हुए वित्त वर्ष में सिर्फ 26 करोड़ रुपये थी. वहीं बीते वित्त वर्ष में कंपनी ने बीजू जनता दल को 25 करोड़ रुपये (इससे पिछले वित्त वर्ष में 15 करोड़ रुपये), झारखंड मुक्ति मोर्चा को 20 करोड़ रुपये (इससे पिछले वित्त वर्ष में पांच करोड़ रुपये) और कांग्रेस को 10 करोड़ रुपये (पिछले वित्त वर्ष में भी 49 करोड़ रुपये) का चंदा दिया.
बता दें कि वेदांता राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने के मामले में सबसे बड़ी कंपनियों में से एक है. इसी क्रम में कंपनी ने वित्त वर्ष 2022-23 में राजनीतिक दलों को कुल 155 करोड़ रुपये और 2021-22 में 123 करोड़ रुपये का चंदा दिया था. हालांकि, इन वित्त वर्षों के लिए चंदा पाने वाले राजनीतिक दलों का ब्योरा नहीं दिया गया है.

वेदांता कंपनी ने चुनावी बॉन्ड (अब रद्द हो चुके) के जरिए 2017 से राजनीतिक दलों को 457 करोड़ रुपये का चंदा प्रदान किया है.गौरतलब है कि चुनावी बॉन्ड कंपनियों और व्यक्तियों को राजनीतिक पार्टियों को अपनी पहचान बताए बिना चंदा देने की अनुमति प्रदान करते थे. सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल चुनावी बॉन्ड को असंवैधानिक बताते हुए इनपर रोक लगा दी थी.
वहीं वेदांता का जनहित इलेक्टोरल ट्रस्ट, राजनीतिक पार्टियों को चंदा देने के लिए कंपनियों द्वारा स्थापित एक दर्जन से अधिक चुनावी न्यास में से एक है. इसी तरह के न्यास टाटा का प्रोग्रेसिव इलेक्टोरल ट्रस्ट भी है.
कंपनियों द्वारा स्थापित इसी तरह के अन्य न्यास में रिलायंस का पीपल्स इलेक्टोरल ट्रस्ट, भारती समूह का सत्या इलेक्टोरल ट्रस्ट, एमपी बिड़ला समूह का परिवर्तन इलेक्टोरल ट्रस्ट और के के बिड़ला समूह का समाज इलेक्टोरल ट्रस्ट एसोसिएशन शामिल हैं. बजाज और महिंद्रा के भी इसी तरह के इलेक्टोरल ट्रस्ट हैं.

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