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476 राजनीतिक दलों ने 6 साल से नहीं लड़ा एक भी चुनाव, अब निर्वाचन आयोग करने जा रहा बड़ी कार्रवाई

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476 राजनीतिक दलों ने 6 साल से नहीं लड़ा एक भी चुनाव, अब निर्वाचन आयोग करने जा रहा बड़ी कार्रवाई
नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने पिछले 6 साल से लगातार एक भी चुनाव लड़ने की अनिवार्य शर्त पूरी करने में विफल रहने वाली 2,854 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (RUPP) की लिस्ट में से 476 दलों को हटाने का काम शुरू कर दिया है.
इसको लेकर विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों (यूटी) के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) ने पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं.
इन पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) को भारत के चुनाव आयोग (ईसीआई) द्वारा सूची से हटाने के लिए पहचाना गया है. शनिवार को पोल पैनल के सूत्रों ने दावा किया.
चुनावी व्यवस्था दुरुस्त करने की व्यापक और सतत नीति के तहत निर्वाचन आयोग 2019 से लगातार 6 साल तक एक भी चुनाव लड़ने की अनिवार्य शर्त पूरी करने में विफल रहे पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) की पहचान करने और उन्हें सूची से हटाने का राष्ट्रव्यापी अभियान चला रहा है.
गौरतलब है कि चुनाव आयोग ने अपनी दूसरी प्रक्रिया के तहत देश भर के विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 476 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) को सूची से हटाने के लिए चिन्हित किया है. इनमें से सबसे अधिक आरयूपीपी उत्तर प्रदेश (121) से हैं, इसके बाद महाराष्ट्र (44), तमिलनाडु (42) और दिल्ली (41) से हैं.
इस पहल के शुरुआती चरण में, निर्वाचन आयोग ने 9 अगस्त 2025 को 334 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) को सूची से हटाया है, जिससे सूचीबद्ध आरयूपीपी की संख्या 2,854 से घटकर 2,520 रह गई है. इस प्रक्रिया के दूसरे चरण में देश भर के अलग-अलग राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से 476 और पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों की पहचान की गई है.
आरयूपीपी कैसे पंजीकृत होते हैं?
जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के प्रावधानों के तहत देश में राजनीतिक दल (राष्ट्रीय/राज्य स्तरीय/पंजीकृत गैर मान्यता प्राप्त) भारत निर्वाचन आयोग में पंजीकृत होते हैं.
राजनीतिक दलों के पंजीकरण संबंधी दिशानिर्देशों में कहा गया है कि यदि कोई दल 6 साल तक लगातार चुनाव नहीं लड़ता है, तो उसे पंजीकृत पार्टियों की सूची से हटा दिया जाएगा.
आरयूपीपी के लाभ
अधिनियम के प्रावधानों के तहत किसी भी संघ को राजनीतिक दल के रूप में पंजीकृत होने के बाद, चुनाव चिह्न, टैक्स छूट आदि कुछ विशेषाधिकार और फायदे मिलते हैं.
चुनाव आयोग के सूत्रों ने शनिवार को ईटीवी भारत को बताया कि, इन 476 पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों (आरयूपीपी) को सूची से हटाने की प्रक्रिया शुरू हो गई है. संबंधित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य कार्यकारी अधिकारियों द्वारा इन आरयूपीपी को कारण बताओ नोटिस भेजे गए हैं.
चुनाव आयोग के सूत्रों ने कहा कि ये पंजीकृत गैर-मान्यता प्राप्त राजनीतिक दल (आरयूपीपी) वे हैं जिन्होंने लंबे समय से चुनाव नहीं लड़ा है. उन्होंने कहा, “ये वे आरयूपीपी हैं जिन्होंने लंबे समय से कोई चुनाव नहीं लड़ा है. नोटिस जारी होने के बाद, उन्हें दिए गए समय के भीतर जवाब देना होगा. सुनवाई के दौरान, उन्हें मांगे गए अतिरिक्त दस्तावेज़ भी जमा करने होंगे.”
पोल में शामिल सूत्रों ने बताया कि अगर जवाब संतोषजनक नहीं रहा, तो सीईओ कार्रवाई का प्रस्ताव देंगे ताकि उन्हें सूची से हटाया जा सके. सीईओ अपनी रिपोर्ट चुनाव आयोग को भेजेगा और वह अंतिम निर्णय लेगा.

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