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कोली कोरी समाज में संस्थानिक महापरिवर्तन की तैयार…एकता के प्रयास लगातार जारी…

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दिल्ली 01जून , अखिल भारतीय कोली/कोरी समाज समन्वय महापरिषद्” का दस्तावेज़ है। इसमें परिषद् के उद्देश्य और क्रियान्वयन की योजना दी गई है।

मुख्य उद्देश्य

  1. “एक शहर में एक कार्यक्रम”: सभी संगठन मिलकर हर शहर में एक साझा कार्यक्रम करेंगे। इसमें शामिल हैं:
    • बुद्ध पूर्णिमा जयंती, झलकारी बाई जयंती, संत कबीरदास जयंती, भगवान मान्धाता जयंती, तानाजी राव मालसुरे जयंती, मुम्बादेवी जयंती, महामाया देवी जयंती
    • सम्मान समारोह, परिचय सम्मेलन, सामूहिक विवाह सम्मेलन
  2. राजनीतिक एकता: दस्तावेज़ के अनुसार भारत में 22 करोड़ कोली/कोरी समाज के लोग हैं, पर राजनीतिक प्रभाव नहीं दिखता। इसलिए एकता ज़रूरी बताई गई है।
  3. सड़क पर प्रदर्शन: सिर्फ कहने से एकता नहीं होगी। सभी 22 करोड़ लोगों को अपनी ताकत दिखाने के लिए सड़क पर आकर प्रदर्शन करना होगा।
  4. राजनीतिक भागीदारी: परिषद् समाज के अधिकारों के लिए राजनीतिक पार्टियों और शासन को प्रस्ताव भेजेगी।

क्रियान्वयन कैसे होगा

  1. प्रदेश स्तर: हर प्रदेश में “एकता समन्वयक संयोजक” और “सह संयोजक” नियुक्त होंगे।
  2. जिला स्तर: प्रदेश संयोजक हर जिले में “जिला एकता समन्वय संयोजक” और “सह संयोजक” नियुक्त करेंगे।
  3. राष्ट्रीय समिति: इसमें होंगे:
    • राष्ट्रीय अध्यक्ष – 1
    • राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष – 1
    • महासचिव – 2
    • कोषाध्यक्ष – 1

संपर्क: डॉ. एम.एल. माहौर, मो.: 9826187317

इस बारे में आप कुछ खास जानना चाहते हैं? जैसे कोई पॉइंट समझना हो या इसे पोस्टर/पैम्फलेट के रूप में बनवाना हो?

देश के समस्त बुद्धिजीवी, शिक्षाविद्, अधिकारी एवं सक्रिय समाजसेवी विभिन्न संगठनों में बिखरे हुए कोरी कोली समाज को संगठित करने हेतु आगे आकर इस विराट अभियान में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने की अपील की जा रही है समाज के लोगों को वास्तविक समाज के संगठन और सेवकों को लेकर अपनी भ्रांतियां दूर करनी होगी केवल राजनीतिक महत्वाकांक्षा पाले बैठे लोगों को पहचाने की आवश्यकता है ताकि इसे लोगों से समाज को बचाया जा सके।
कोरी समाज की एकता एवं सशक्त उपस्थिति स्थापित करने हेतु सभी सामाजिक संगठनों को एक मंच पर बैठने के लिए प्रेरित करें। उन्हें यह विश्वास दिलाया जाए कि उनके संगठन, पद एवं पहचान पूर्णतः यथावत रहेंगे। किसी भी संगठन का किसी अन्य संगठन में विलय नहीं किया जाएगा। सभी के कार्यक्रम, बैनर एवं दायित्व सुरक्षित रहेंगे। किसी के मान-सम्मान, अधिकार अथवा स्वायत्तता में कोई कमी नहीं आएगी।
इस पहल का उद्देश्य केवल साथ बैठकर समाजहित में एक व्यापक नीति तैयार करना, आपसी एकता का प्रदर्शन करना तथा समाज के सर्वांगीण विकास पर सार्थक विमर्श करना है। साथ ही, स्वजातीय राजनीतिक नेताओं को उनकी-उनकी पार्टियों में प्रभावशाली भूमिका एवं मजबूत सहभागिता दिलाने हेतु सामूहिक रणनीति भी तैयार की जाएगी।

kalkasamrat
Author: kalkasamrat

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