जी हां जमीनी स्तर पर नाम मात्र की उपस्थिति कोली समाज में रखने वाले संगठनों के तथाकथित कार्यकर्ताओं पदाधिकारियों के द्वारा आगामी 14 जून को और 21 जून को दिल्ली में तथा कथित रूप से राष्ट्रीय सम्मेलनों का आयोजन किया जा रहा है । इसके नाम पर राजनीतिक महत्वाकांक्षा पाले बैठे कोलियों से चंदा वसूलियां की जा रही है, और पदों के लालच दिए जा रहे हैं, वास्तव में कोली समाज की वर्तमान में क्या स्थिति है इसके बारे में कोई सर्वे रिपोर्ट नहीं है किसी भी संगठन के पास भी कोई आंकड़ा नहीं है। क्योंकि सभी जेबी संगठन बने हुए हैं, और खुद मुख्तारी पर अपने-अपने संगठनों को ठेला जा रहा है ।और समाज पर तथाकथित रूप से जबरदस्ती थोपने का कार्य किया जा रहा है,, यही दर्शाया जा रहा है कि यही एक मात्र संगठन है जो कि पूरे देश के कोली समाज का प्रतिनिधित्व करता है,,,जबकि यह सही नहीं है।
ऐसे में आगामी 14 जून को गुजरात के कैबिनेट मंत्री कुंवर जी भाई बावलिया के नेतृत्व में दिल्ली में राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है वहीं दूसरी ओर वीरेंद्र कश्यप पूर्व सांसद शिमला हिमाचल के नेतृत्व में भी दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया जा रहा है जिसमें पूरे देश से वार्ड पंच, पार्षद ,सरपंच, विधायक, सांसद के टिकटों की दावेदारी करने वाले लोग जो राजनीतिक महत्वाकांक्षा पाल कर रखे हुए हैं। जिनके लिए यह संगठन तथा कथित रूप से राजनीति की पहली सीढ़ी का काम करता है ऐसे लोगों का जमावड़ा आगामी दिनों में दिल्ली में होने जा रहा है इसे ही कुलड़ी में गुड फोड़कर आपस में बांट लेने कि कला के रूप में भी देखा जा सकता है।
क्योंकि इन तथाकथित होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलनों से आम कोली अवाम को तो शायद कोई फायदा हो या ना हो उसका कोई भला हो या ना हो परंतु लोग अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने में जरूर कामयाब हो जाएंगे।
जबकि वहीं दूसरी ओर अखिल भारतीय कोली/ कोरी समाज भारत पंजीकृत नई दिल्ली भी एक शानदार और बेहतरीन संगठन है जोकि नीति आयोग, MSME, 80G तथा 12A चंदा लेने का अधिकार बस फर्क इतना है कि उसे संगठन का मुखिया किसी राजनीतिक दल का पिट्ठू नहीं है। और ना ही कभी सांसद विधायक पार्षद रहा है इस संगठन का पूरे देश के 18 राज्यों में प्रचार प्रसार है और संगठन सुचारू रूप से संचालित भी हो रहा है हालांकि इस संगठन से भी गुजरात राज्य के विधायक सांसद राज्य मंत्री केंद्र सरकार में मंत्री भी संरक्षक के रूप में शामिल है परंतु उनका सीधा हस्तक्षेप इस संगठन के कार्य कलापों में नहीं होता है और इस संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील कुमार माहौर एक जुझारू कार्यकर्ता के रूप में समाज को संगठित करने और समाज को उसका का वाजिब हक दिलवाने के लिए प्रयासरथ है। संगठन यूपीएससी, IAS की कोचिंग के किए कार्य करने जा रहा है
अखिल भारतीय कोली कोरी समाज भारत पंजीकृत नई दिल्ली के राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील कुमार माहौर ने आरोप लगाया है कि वर्तमान में इस संगठन का कोई अस्तित्व ही मौजूद नहीं है एक ही संगठन के पंजीकरण पर तीन-तीन तथा कथित रूप से राष्ट्रीय अध्यक्ष संगठन चलाने का प्रयास कर रहे हैं तीन-तीन राष्ट्रीय महासचिव अलग-अलग रूप से नियुक्तियां पत्र देना और संगठन की गतिविधियों के बारे में जानकारियां देना का कार्य कर रहे हैं जो की किसी भी विधिक रूप से स्थापित संगठन के लिए मान्य नहीं होता है और वहीं दूसरी ओर यह संगठन अवैधानिक रूप से पूरे देश के कोली समाज को गुमराह करके चंदा वसूली भी कर रहे हैं ।ऐसे में समाज को गुमराह होने से रोकने के लिए 5356/1971/72 पंजीकरण संख्या पर पंजीकृत है।वर्तमान में एक ही पंजीयन क्रमांक पर तीन,तीन राष्ट्रीय अध्यक्ष होना ओर तीनों का ही स्वयं को असली अध्यक्ष बताना समाज में बिखराव का कारण बन रहा है,,इसी के मद्देनजर अखिल भारतीय कोली कोरी समाज पंजीकृत भारत नई दिल्ली के द्वारा आगामी दिनों में एक राष्ट्रीय सम्मेलन दिल्ली के सांसद क्लब में राष्ट्रीय अध्यक्ष सुनील माहौर कोली की अध्यक्षता में करवाए जाने का निर्णय आगामी दिनों में लिया जाना है ताकि वस्तु स्थिति स्पष्ट हो सके। उससे पहले सभी प्रदेश अध्यक्षों और जिला अध्यक्षों से उनके क्षेत्र का फीड बैक लिया जाएगा।
वहीं दूसरी ओर अखिल भारतीय कोली समाज परिषद भोपाल मध्य प्रदेश के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश कुमार भमोरिया ने भी आरोप लगाया कि आखिर संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्षों और पदाधिकारी का वास्तविक विश्लेषण और स्थिति जब किसी को भी पता ही नहीं है तो आखिर यह तथाकथित रूप से होने वाले राष्ट्रीय सम्मेलन कुछ निजी लोगों की महत्वाकांक्षाओं की पूर्ति के लिए किसी एक राजनीतिक दल को लाभ पहुंचाने के लिए तो नहीं किया जा रहे हैं। आखिर एक ही पंजीकरण क्रमांक पर पंजीकरण संस्था के अलग-अलग राष्ट्रीय अध्यक्ष क्या साबित करना चाहते हैं।ऐसा भी नहीं है कि जो अध्यक्ष वर्तमान में बने हुए है वो कोई मामूली लोग हैं,सभी समझदार और गणमान्य है फिर भी समाज को जान बुझ कर पतन के गर्त में धकेला जा रहा है।






