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दयानंद कॉलेज का खेल मैदान बना अयोध्या नगरी, श्रद्धालुओं का उमड़ा आस्था का जनसैलाब।

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अजमेर में ऐतिहासिक बना 5151 आसनों का लक्ष्य, 7236 आसनों पर हुआ सामूहिक श्री सुन्दरकाण्ड पाठ दयानंद कॉलेज का खेल मैदान बना अयोध्या नगरी, श्रद्धालुओं का उमड़ा आस्था का जनसैलाब।
अजमेर शहर। धार्मिक, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना से ओत-प्रोत अजमेर नगर में बुधवार को एक ऐतिहासिक, भव्य एवं दिव्य आयोजन साक्षात साकार हुआ। दयानंद कॉलेज (डीएवी कॉलेज), ब्यावर रोड, रामगंज, अजमेर स्थित खेल मैदान में 5151 आसनों पर सामूहिक श्री सुन्दरकाण्ड पाठ के लक्ष्य के साथ आयोजित कार्यक्रम में श्रद्धालुओं की आस्था इतनी प्रबल रही की कि सहभागिता 7236 आसनों तक पहुंच गई, जिससे यह आयोजन ऐतिहासिक बन गया।
आज का दिन मकर संक्रांति एवं एकादशी जैसे पावन पर्वों से युक्त होने के कारण इस आयोजन की आध्यात्मिक महत्ता और अधिक बढ़ गई। इस शुभ अवसर पर सम्पन्न यह आयोजन अजमेर दक्षिण श्री सनातन संस्कृति संरक्षण प्रन्यास के तत्वावधान में एवं अजमेर दक्षिण विधायक अनिता भदेल के मार्गदर्शन में सम्पन्न हुआ।
इस दिव्य आयोजन में विश्वविख्यात संत माननीय रसराज जी महाराज द्वारा अत्यंत भावपूर्ण, संगीतमय एवं भक्तिरस से ओत-प्रोत श्री सुन्दरकाण्ड पाठ का गायन किया गया। जैसे ही महाराज श्री के मुखारविंद से चौपाइयों का सस्वर उच्चारण हुआ, संगीतमय सुन्दरकाण्ड से सम्पूर्ण वातावरण राममय हो उठा और हजारों श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भक्ति में लीन हो गए।
संकट कटे, मिटे सब पिरा, जो सुमिरे हनुमत बलवीरा
लक्ष्य 5151 आसन, सहभागिता 7236-आस्था ने रचा इतिहास

आयोजन का उद्देश्य 5151 आसनों पर सामूहिक पाठ सम्पन्न कराना था, किंतु श्रद्धालुओं की अपार आस्था और उत्साह के चलते सहभागिता 7236 आसनों तक पहुंच गई। प्रातः काल से ही आयोजन स्थल पर श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। दूर-दराज क्षेत्रों से आए रामभक्तों, मातृशक्ति, युवाओं, वरिष्ठजनों एवं संतजनों की उपस्थिति ने इस आयोजन को अभूतपूर्व और ऐतिहासिक बना दिया। पूरा खेल मैदान मानो अयोध्या नगरी में परिवर्तित हो गया और “जय श्री राम” के जयघोष से आकाश गूंज उठा। मंगल भवन अमंगल हारि, द्रवहू जो दशरत अजहर बिहारी

अयोध्या नगरी की तर्ज पर भव्य सजावट-

डीएवी कॉलेज का खेल मैदान अयोध्या नगरी की तर्ज पर भव्य रूप से सजाया गया। अयोध्या स्थित श्रीराम मंदिर से प्रेरित भव्य एवं मनोहारी भगवान श्रीराम की प्रतिमा विशाल मंच पर स्थापित की गई, जिससे सम्पूर्ण पंडाल अयोध्यामय हो गया। भव्य प्रवेश द्वार, भगवा ध्वज, पुष्प सज्जा, आकर्षक प्रकाश व्यवस्था एवं धार्मिक प्रतीकों ने आयोजन स्थल को अलौकिक स्वरूप प्रदान किया। पंडाल के दोनों ओर श्रीरामचरितमानस से प्रेरित देवी-देवताओं, महान संतों एवं महापुरुषों के चित्र एवं उनके प्रेरणादायी विचार प्रदर्शित किए गए, जिन्होंने श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक व नैतिक प्रेरणा प्रदान की। इनमें मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम, हनुमान जी के अतिरिक्त स्वामी विववेकानन्द, स्वामी दयानन्द सरस्वती, महर्षि वेदवव्यास, महर्षि वाल्मिकी,, गुरूनानक देव, सुदामा, महर्षि दाधिची, संत रविदास, मीराबाई, संत एकनाथ, अवधेषानन्द गिरी जी, सूरदास, रामकृष्ण परमहंस, चौत्न्य महाप्रभु, भगवान परषुराम, रामानुजाचार्य, श्री चौतन्य महाप्रभु, भक्त प्रहलाद, संत गोरखनाथ, जगतगुरू आदि शंकराचाय, माता शबरी, गोस्वामी तुलसीदास, संत नामदेव, संत कबीरदास, प्रेमानंद जी, गोविन्द गिरी जी, रामभद्राचार्य जी, नीम करौली बाबा, मलूक पीठ के राजेन्द्रदास जीे की प्रतिमाए शामिल रही।

सुव्यवस्थित खंड व्यवस्था
श्रद्धालुओं की सुविधा हेतु आयोजन स्थल को 10 खंडों में विभाजित किया गया। पुरुष एवं महिला श्रद्धालुओं के लिए पृथक व्यवस्था की गई।
पुरुष खंड-दशरथ खंड, भरत खंड, लक्ष्मण खंड, शत्रुघ्न खंड, लव-कुश खंड, महिला खंड-माता जानकी खंड, माता कौशल्या खंड, माता मांडवी खंड, माता श्रुतिकीर्ति खंड, माता उर्मिला खंड। इन नामकरणों ने आयोजन की धार्मिक गरिमा को और अधिक प्रगाढ़ किया।

तुम रक्षक काहू हो को डर ना
श्रद्धालुओं की सुविधाओं को सर्वाेच्च प्राथमिकता-

श्रद्धालुओं हेतु पार्किंग, चरण पादुका सुरक्षित रखने के लिए 20 अलग-अलग खंड एवं टोकन प्रणाली लागू की गई। आसनधारियों को उनके स्थान पर ही जल उपलब्ध कराया गया, जिससे किसी प्रकार की असुविधा न हो। वृद्धावस्था के कारण भूमि पर बैठने में असमर्थ व्यक्तियों के लिए विशेष व्यवस्था के लिए कुर्सियां लगवाई गई। ताकि बुजर्ग व्यक्ति आराम से बैठकर श्री सुन्दरकाण्ड पाठ का आनंद लेकर धर्मलाभ प्राप्त कर सकें।

वैदिक मंत्रोच्चार से शुभारंभ-
कार्यक्रम का शुभारंभ ब्रह्म सावित्री वेद विद्यापीठ के दो आचार्यगण वेदमूति आचार्य श्री अर्जुन शर्मा तथा वेद मूति आचार्य श्री चेतन्य शर्मा के निर्देशन में नौ वैदिक वटुकों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ हुआ। मंत्रध्वनि से सम्पूर्ण वातावरण वैदिक ऊर्जा से भर गया।
रसराज जी महाराज का संगीतमय पाठ- भक्तिरस की अविरल धारा –रसराज जी महाराज की मधुर वाणी, भावव्याख्या एवं संगीतमय प्रस्तुति ने श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। ऐसा प्रतीत हुआ मानो सम्पूर्ण मैदान एक साथ प्रभु श्रीराम की आराधना में लीन हो गया हो।
आठ वैदिक पंडितों द्वारा भव्य महाआरती –
समापन अवसर पर आठ वैदिक पंडितों द्वारा विधिवत भव्य महाआरती सम्पन्न कराई गई। शंखनाद, मंत्रोच्चार और दीपों की रोशनी से पूरा पंडाल दिव्यता से भर उठा।
निम्बार्काचार्य जी महाराज की गरिमामयी उपस्थिति –
कार्यक्रम में निम्बार्काचार्य जी महाराज के पधारने से आयोजन को विशेष दिव्यता प्राप्त हुई। उनके सुमधुर वचनों ने भक्तों को भाव-विभोर कर दिया।
जय हनुमान ज्ञान गुण सागर
राजगढ धाम के महाराज श्री चम्पालाल जी, गोकुलधाम आश्रम के महाराज वीरभद्र जी, स्वामी लवकुश हरि जी निर्मल आश्रम, घाटी वाले बालाजी के महाराज, रामा कृष्णदेव जी महाराज नौसर माता मंदिर, कृष्णा गिरी जी व विद्या गिरी जी महाराज कार्यसिद्धी वाले बालाजी रामगंज, त्रिरजू जी महाराज आदि संतजनों की उपस्थिति कार्यक्रम को और अधिक दिव्यता प्रदान की।

इस सुअवसर पर जनप्रतिनिधि एवं प्रबुद्यजन केन्द्रीय मंत्री व सांसद भागीरथ चौधरी, जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत, पूर्व भाजपा विधायक हरीश झामनानी, अजमेर शहर जिला अध्यक्ष रमेश सोनी व ग्रामीण जीतमल प्रजापत, पूर्व महापौर धर्मेन्द्र गहलोत, पूर्व सभापति सुरेन्द्र सिंह शेखावत, सुनील दत्त जैन, हनुमान सिंह राठौड, नगर निगम उपायुक्त कीर्ति कुमावत, सीएमएचओ ज्योत्सना रंगा, जेएलएन अधीक्षक अरविन्द खरे, प्रधानाचार्य अनिल सामरिया आदि उपस्थित रहे। बल, बुद्धि, विद्या देहू मोह, हरेहू कलेश विकार सनातन संस्कृति के संरक्षण का संदेश -

विधायक श्रीमती अनिता भदेल ने कहा कि 5151 आसनों के लक्ष्य से प्रारंभ हुआ यह आयोजन 7236 आसनों तक पहुंचना सनातन संस्कृति के प्रति समाज की गहरी आस्था का प्रतीक है। ऐसे आयोजनों से आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक एकता और सांस्कृतिक मूल्यों को बल मिलता है। जय-जय-जय हनुमान गुसाईं, कृपा करेहूू गुरू देव की नाई समापन-

दयानंद कॉलेज खेल मैदान में आयोजित यह सामूहिक श्री सुन्दरकाण्ड पाठ अजमेर के धार्मिक इतिहास में स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज हो गया। यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और आध्यात्मिक ऊर्जा का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा।
इस पुण्य अवसर पर अजमेर दक्षिण श्री सनातन संस्कृति संरक्षण प्रन्यास की ओर से कमल पंवार, राजेश घाटे, रविन्द्र सिंह जादौन, हितेश ढाबरिया, रजनीश चौहान, अजीत चौधरी, हेमंत सांखला, देवेन्द्र सिंह शेखावत, सीमा गोस्वामी, गौरव शर्मा, अंकित गुर्जर, गौरव टांक, गोविन्द राज, उमेश गर्ग, रणजीत सिंह नरुका, मोहन लालवानी, हेमंत फौजी, मयंक शर्मा, पारस, तुलसी, विपिन, मोहित, बलराम, गोविन्द, लक्की, गोपाल, महेश, महेश्वर झां, मोनू सैन, विष्णु सेन, अजय ज्योतियाना, पुलकित दाधीच, अमन पारचे, प्रियांश नरवाल, तुषार, अभय, सागर, हनी, यश, आश, संदेश, कबीर, विष्णु, दिलावर चौहान, सन्नी तिवारी, अमित सैनी, राजू जादम, प्रदीप गढवाल, रवि गढवाल, दिलेश बघेल, संजय शर्मा, हारू भाई, लोकेश लॉयड, महेन्द्र मेघवंशी, देवेश शेखावत, हेमंत सुनारीवाल, सागर झामनानी, राहुल खटुमरा, जय तिवारी, भोपालकांत, सुरेन्द्र वर्णवाल, रोहित अलूदिया, गजेन्द्र, यतेन्द्र चौहान, रीना कुश्वाहा, बीना टांक, शीलम बैरवा, अंजना शेखावत, कृष्णा सोनी, ज्योति लालवानी, किरण तुनगरिया, तारा राजपुरोहित, मालती रावत, मंजु ओझा, रेनु शर्मा, मंजू शर्मा, पूजा शर्मा, सुरेश गुर्जर, संदीप माखीजानी, भरत, विवेक शर्मा, अमित टांक, दीपक शर्मा, अंकुर प्रजापति, हरीसिंह पंवार, प्रवीण पंवार, महेन्द्र राव, अजय सोनगरा, वर्तिका शर्मा, जितेन्द्र गहलोत, उत्तमचंद पंवार, कमल वर्मा, संतोष मौर्य, बलराज कच्छावा, गीता जांगिड, सम्पत भाटी, मोनिका सांखला, काजल जेठवानी, रोशनी माखीजानी, राजेश चौहान, पतराम यादव, मधु भारद्वाज, हेमेन्द्र जैन, शोभा शर्मा, लता शर्मा, रजनी बघेल, अनिता चौहान, सीमा शर्मा, मंयक यादव, भवानी सिंह जेदिया, प्रशान्त यादव, मोनिका सुईवाल, रोहित सोगरा, चिराग चौधरी, उमेश मीणा, अखिल सिसोदिया, कमलेश सेन, रोहित सैनी, माया फुलवारी, ऋषि छाबडा, सतीश शेरा, राजेश मोर्य, गणेश रावत, विकास डिडवानिया, घनश्याम खत्री, उमेश माखीजानी, राजेश शर्मा, रोमेश मिश्रा, निक्की जैन, सोनू शिवहरे, मुकेश चौहान, जीवन तेजी, धर्मेन्द्र सुईवाल, राजकुमार भाटी, विनोद बागोरिया, अजीत वासन, भावना चौहान, सुन्दर टांक, मोनिका ढलवाल, रीना माहेश्वरी, हेमलता खत्री, बबीता चौहान, निर्मला सिंह, सुभाष भटनागर, राजू सिंह, दिलीप, मनीषा गौड, लता रजवानी, हेमलता शर्मा, अनिता अग्रवाल, सुमन लोठ, वंदना शर्मा, चेतन माली, मनोज कुमार, प्रवीण कुमार, गौरव उपाध्याय, श्यामलाल तंवर, कृष्णा सुचेता, भीम सिंह, पीयूष शर्मा, विक्रम तम्बोली, मुकेश मेघवंशी, हरीश गर्ग, नाथू सिंह भाटी, आनन्द भडाणा, दिनेश जैन, मानस शर्मा, मुकेश पंचौली, लवनीश बनिया, प्रदीप चौहान, हरीश चौहान, यशपाल, रोहित तम्बोली, गोविन्द बंशीवाल, रमेश निमेडिया, मोहन राजोरिया, भारत भूषण, विजय गोयर, लक्की सिंह, चित्रांश गढवाल, बजरंग, प्रवीण पांचाल, घनश्याम वर्मा, विजय दुलानी कार्यकर्ता ने पूर्ण समर्पण की भावना से आयोजन में सहयोग प्रदान किया।

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Author: kalkasamrat

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