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दिल्ली में अनुसूचित जाति जनजाति सम्पादक संघ की रजिस्ट्रेशन के बाद पहली मीटिंग,लिए गए महत्वपूर्ण फैसले

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दिल्ली में अनुसूचित जाति जनजाति सम्पादक संघ की रजिस्ट्रेशन के बाद पहली मीटिंग,लिए गए महत्वपूर्ण फैसले


दिल्ली -दिल्ली में अनुसूचित जाति जनजाति सम्पादक एसोशिएशन का गठन किया गया, जिससे अनुसूचित जाति जनजाति सम्पादकों के सामने आने वाली समस्याओं ओर उनके निराकरण पर विचार किया गया।
आज दिल्ली में रजिस्ट्रेशन के बाद अनुसूचित जाति जनजाति सम्पादक एसोशिएशन की पहली बैठक हुई जिसमें कई राज्यों से सम्पादक अखबारों के प्रकाशन में आने वाली समस्याओं और प्रकाशन सम्बंधित कार्यालय में होने वाले भेदभाव पर भी चर्चा हुई।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष बलवान सिंह ने साफतौर पर कहा, सरकार नहीं चाहती कि छोटे, मझोले समाचारपत्र प्रकाशित हो, क्योंकि ये अखबार सरकार की भाटगीरी नहीं करते। इंसोसिएशन के उपाध्यक्ष सत्यपाल सिंह ने कहा सरकार की पूर्ण मंशा है कि छोटे मझोले समाचारपत्र बंद हो,और कुछ धनाढ्य परिवार की फूलें फले , इसलिए सरकार कई वर्षों से नये प्रकाशित अखबारों को डीएवीपी मान्यता नहीं दे रही और प्रकाशकों पर नये नये बेतुकी नियम लाद रही हैं। संचालक करते हुए महासचिव विनोद कुमार ने कहा, सरकार सभी की होती है, सभी के साथ एक जैसा व्यवहार करना चाहिए,ना की धनाढ्य गोद में और छोटे मझोलो की अनदेखी। जब संविधान में सबको बराबर का हक़ है तो कथनी और करनी में अंतर क्यों? क्या यही लोकतंत्र तंत्र है।
संयुक्त सचिव ओमवीर सिंह ने कहा कि कहने को तो पत्रकार को चौथा स्तम्भ कहा जाता है, लेकिन इसके लिए ना कोई सुरक्षा, ना ही जीवन चलाने का साधन तो फिर कैसे लोकतंत्र का चौथा स्तंभ है। यो कहिए बिना दांतों का शेर है, जिसके पास सुरक्षा के लिए दांत नहीं,पेट भरने को भोजन नहीं। असल में छोटे मझोले समाचारपत्र आज भी और पहले भी पत्रकारिता करते आ रहे हैं धंधा नहीं।
कोषाध्यक्ष डॉ जरनैल सिंह रंगा ने कहा कोई भी संगठन बिना धन के लिए नहीं चलता है, इस लिए संगठन को अपने सदस्यों से मुनासिब सदस्य शुल्क लेना होगा, संगठन बदलें में उन्हें एश्योरेंस सहित अन्य सुविधा देगा, साथ ही उनके हकों अधिकारो के लिए जनजागरण अभियान चलाएगा। उन्होंने सुझाव दिया कि संगठन को अनुभवी पत्रकारों, साहित्यकारों को अपने संरक्षण मंडल में शामिल करना चाहिए,साथ ही साथ कुछ सलाहकारों के रुप में कानून के जानकार भी संरक्षण मंडल में शामिल हो।
इनके अलावा रविकांत, अशोक प्रेमी, रामचंद्र सिंह आदि मौजूद रहे।
बैठक में अनुसूचित जाति जनजाति आदि पर हो रहे अत्याचारों की अनदेखी ना होने दें। उनकी बात सुनी जाए और उन्हें भी लगे कि उनका भी कोई है।

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Author: kalkasamrat

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