न्यायालय ने एलिवेटेड ब्रिज को खोलने के दिए आदेश:RSRDC अधिकारी ने कोर्ट में दिया शपथ पत्र, रामसेतु ब्रिज को लेकर हुई थी सुनवाई
अजमेर
अजमेर में एलिवेटेड रोड ( राम सेतु ब्रिज) को लेकर लगाई गई जनहित याचिका पर शुक्रवार को सुनवाई हुई। सुनवाई में दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं के बीच बहस हुई।
न्यायालय में आरएसआरडीसी अधिकारी की ओर से एलिवेटेड रोड को सुरक्षित बताते हुए कोर्ट में एक शपथ पत्र दिया गया। इसके बाद न्यायालय ने एलिवेटेड ब्रिज के चारों भुजाओं को खोलने और आमजन की सुरक्षा को देखते हुए ब्रिज पर टोल फ्री नंबर लगाने के आदेश दिए। आदेश के तुरंत बाद जिला प्रशासन ने ब्रिज के आवागमन को खोल दिया।
बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अशोक सिंह रावत ने बताया कि राम सेतु ब्रिज 3 साल के अंदर खराब हो गया। इसे लेकर कोर्ट में जनहित याचिका लगाई गई थी। जिसमें न्यायालय ने पूर्व में सुनवाई करते हुए आवागमन पर रोक लगाई थी। उसके बाद आज वापस मामले में सुनवाई हुई
अध्यक्ष ने बताया कि ब्रिज खोलने से पहले अधिकारियों से एक शपथ पत्र जिम्मेदारी लेने के लिए मांगा गया था। इसके बाद आरएसआरडीसी की अधिकारी की ओर से कोर्ट में शपथ पत्र दिया गया। इसके बाद न्यायालय ने आदेश जारी करते हुए एलिवेटेड रोड की चारों भुजाओं को खोल दिया। इसके साथ ही आमजन की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए टोल फ्री नंबर भी और सुरक्षा के पुख्ता बंदोबस्त करने के भी आदेश दिए।
ब्रिज पर आवागमन बंद करने से शहर में हुआ था जाम
न्यायालय की ओर से सुनवाई करते हुए जिला कलेक्टर को ब्रिज पर आवागमन बंद करने के आदेश दिए थे। न्यायालय के आदेश की पालना करते हुए चारों भुजाओं पर आवागमन बंद कर दिया था। इसके बाद शहर में जाम की स्थिति पैदा हो गई
जांच को प्रभावित करने का आरोप
लोक अभियोजक जेपी शर्मा ने आरोप लगाया की याचिकाकर्ता एलिवेटेड निर्माण की विस्तृत जांच को प्रभावित करना चाहते हैं। खुद याचिकाकर्ता एलिवेटेड से यातायात रोके जाने की मांग नहीं कर रहे थे। जो रिलीफ मांगा ही नहीं गया वह दिया गया। अस्थाई निषेधाज्ञा में एलिवेटेड को चालू करने की मांग की थी। एलिवेटेड रोड की एक भुजा के संबंध में आदेश जारी होना चाहिए था। बरसात में एलिवेटेड के नीचे सड़क पर पानी भर जाता है। इसलिए एक क्षतिग्रस्त भुजा को छोड़कर शेष पर ट्रैफिक चालू किया जाए।







